नोबेल, गरीबी और आंबेडकर

भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी, फ्रांस मूल की उनकी शोध छात्रा रही पत्नी एस्टर डफ्लो और अमेरिकी अर्थशास्त्री माइकल क्रेमर, तीनों को संयुक्त रूप से नोबेल सम्मान मिलने के बाद से खासकर भारत की गरीबी को लेकर बहस छिड़ गई है। वह इसलिए भी कि जिस देश का एक पांव तरक्की के चांद पर पहुंचने […]

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नारी …

सुनील दत्ता “उठ नारी , वह मृतक है जिसके पाशर्व में तू लेटी है |उठ और इस नवोदित को वर ,उठ और जीवितों के जगत में प्रवेश कर |” …………………………………………………………………………….. मैं नारी हूँ -भारतीय नारी |मेरी कहानी अभिशप्त की है |इस कहानी के प्रसार पर वेदना का विस्तार है ,रक्त का रंग उस पर चढा है […]

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GF से कहा- तुम हां कर दो तो दुनिया पलट दूंगा… और ये शख्स बन गया IPS

रानी राजेश महाराष्ट्र कैडर से IPS मनोज शर्मा की कहानी इस देश के हर युवा के लिए मिसाल है. बीते माह उनके ऊपर उनके ही साथी अनुराग पाठक ने एक किताब लिखी है. ‘12th फेल, हारा वही जो लड़ा नहीं’ शीर्षक से लिखी इस किताब में मनोज शर्मा की जिंदगी का हर वो संघर्ष दर्ज […]

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विवेकी राय एक ऐसे रचनाकार थे

परिचय दास  [ पूर्व सचिव, हिंदी व मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली  ] विवेकी राय एक ऐसे रचनाकार थे, जिनमें अपने गाँव -जवार की गंध थी , दर्द था, समझ थी. जिस गति से उन्होंने खड़ी बोली हिंदी में रचा , उसी दुलार से भोजपुरी में भी सृजन किया. उनके मन में भोजपुरी व खड़ी बोली हिंदी में […]

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अच्छे पर्यावरण की राजनीति

मैं दुनिया के 94 बडे़ शहरों के नेताओं में शामिल हुआ। मुझे कोपेनहेगन में सी 40 जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन को जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण के संदर्भ में उठाए गए कडे़ कदमों पर संबोधित करना था। मैं निजी रूप से सम्मेलन में शामिल नहीं हो सका, इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित किया। सत्तर करोड़ […]

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!!”देखते-ही-देखते आरियां चली और लाशों के ढेर लग गए। इधर विकास, उधर लाश!! ये हरे-भरे पेड़ थे, जो विकास के लिए अपनी बलि दे रहे थे

लघुकथा/ बलि… –Girish Pankaj अपने-अपने हाथों में आरियां लेकर वे लोग बढ़े जा रहे थे । सबकी जुबान पर एक ही नारा था, “विकास.. विकास ..विकास !!”देखते-ही-देखते आरियां चली और लाशों के ढेर लग गए। इधर विकास, उधर लाश!! ये हरे-भरे पेड़ थे, जो विकास के लिए अपनी बलि दे रहे थे। उनकी आंखों में […]

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क़लम का जादूगर-डाॅ.राही मासूम रज़ा

मक़बूल ‘वाजिद’ दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी पैदा होते हैं जो अपने जीवन में ही किबंदन्ति बन जाते हैं। ऐसे ही चन्द लोगोें में डाॅ. राही मासूम रज़ा का भी नाम निहायत इज्ज़त-वो-एहतराम से लिया जाता है। आप का असली नाम सैय्यद मासूम रजा आबिदी थ। आप के पिता श्री शब्बीर हुसैन आबिदी का […]

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जाग मछन्दर जाग’ का हुआ लोकार्पण

रविवार, २९ सितम्बर । कैफी एकेडमी। घने बादलों की घेरेबंदी को धता बताते हुए लखनऊ और आस-पास के जनपदों के बुद्धिजीवी, लेखक, पत्रकार और सजग नागरिक जुटे। मेरे अग्रलेखों के संकलन ‘जाग मछन्दर जाग’ का लोकार्पण हुआ। उस पर बात हुई। खूब गहमागहमी। विचारोत्तेजना। वाद-संवाद। लोग डटे रहे, सुनते रहे। अध्यक्षता की प्रख्यात आलोचक वीरेन्द्र […]

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आप चतुर हैं या स्‍वार्थी, अपनी उंगलियों से ऐसे जानिए

व्‍यक्‍ति की उंगलियां उसके भविष्‍य का आइना होती हैं। उंगलियों को देखकर व्‍यक्‍ति के बारे में बहुत कुछ अनुमान लगाया जा सकता है।  उंगली मोटी है या नुकीली, उसमें गांठ दिखाई देती हैं या नहीं, ये सभी व्‍यक्‍तित्‍व के बारे में बहुत कुछ बयां करती हैं। हस्‍तरेखा विशेषज्ञ सुखविंदर सिंह से जानिए क्‍या कहती है […]

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सुभाष राय की पुस्तक ‘जाग मछन्दर जाग’ का लोकार्पण २९ सितम्बर को लखनऊ में

लखनऊ । ‘इस लाक्षागृह‌ को किसी न किसी दिन कोई लपट घेरेगी ही, बस चिंता है तो उन लोगों की, जो रास्ता भूल गये, जो पथ भटक गये, जिन्हें लालच ने जकड़ लिया और इस नाते अपनी सहज मानवीयता से वंचित हो गये।’…’चारों ओर बदलाव की आकांक्षाएँ हैं लेकिन किस दिशा में हो बदलाव, कौन […]

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