पुस्तक चर्चा : बीहड़ में साइकिल

-योगेश यादव हमने आज तक तमाम पत्रकारों को देखा है या उनसे मिलना हुआ है, लेकिन इतना ज़मीनी, जुझारू और जिंदादिल कोई पत्रकार शायद ही देखा हो। और मैं यह बड़े गर्व से कह सकता हूँ कि वह पत्रकार कोई और नहीं मेरे साथी शाह आलम हैं। मैं उनसे कई बरस से जुड़ा हूँ। उनके […]

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मैं उस संस्कृति- सभ्यता और समाज की चोली क्या उतारूंगा, जो खुद ही नंगी है..!

मंटो आज पैदा हुआ था ——————————- “मैं उस संस्कृति- सभ्यता और समाज की चोली क्या उतारूंगा, जो खुद ही नंगी है. मैं इसे कपड़े पहनाने की कोशिश भी नही करता. इसलिए कि यह मेरा काम नहीं दर्जियों का है. लोग मुझे स्याह-कलम कहते हैं, लेकिन मैं स्याह तख़्ती पर काले चॉक से नही लिखता. मैं […]

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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और दिल्ली की संगत

–चंचल सर्वेश्वर जी । सर्वेश्वर दयाल सक्सेना । कवि , लेखक , पत्रकार और सबसे बड़े भले इंसान । हमे पंडित जी बुलाते थे । बंगाली मार्केट में अपनी दोनों बेटियों विभा और शुभा के साथ रहते थे । हम दिल्ली पहुंचे तो सर्वेश्वर जी की बेटियों ने ही हमे महावत खान रोड पर एक […]

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स्मृति : खड़ी बोली के प्रथम महाकाव्य ‘प्रियप्रवास’ के महान साहित्यकार अयोध्या सिंह ‘हरिऔध’ का आज 155 वाँ जन्म दिन है…

-जितेन्द्र हरि पांडेय जन्म-15 अप्रैल 1865,मृत्यु -16 मार्च 1947-निज़ामाबाद आज़मगढ़ उप्र। उल्लेखनीय है कि हरिऔध जी ने सन 1909 से 1913 के बीच हिंदी खड़ी बोली का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य ‘प्रिय प्रवास ‘की रचना की जो 1914 में प्रकाशित हुआ।इसकी भूमिका में हरिऔध जी के अनुसार-प्रिय प्रवास एक सशक्त विप्रलम्भ काव्य है जिसकी रचना प्रेम और […]

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फणीश्वरनाथ रेणु की कथाओं में जो आंचलिकता की एक आदिम महक होती है

-सीमा संगसार फणीश्वरनाथ रेणु की कथाओं में जो आंचलिकता की एक आदिम महक होती है वह अन्यत्र दुर्लभ है। रेणु जी ने अपनी कथा कहानियों में जिस तरह से गाँव जवार के लोगों को और उसके परिवेश को जीया है उसे महसूस करना वाकई धान की सुनहरे बालियों में से होकर गुजरना है । उनकी […]

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कोरोना-संदेश : शायद मैं जिन्दगी का सफ़र ले के आ गया, का़तिल को आज अपने ही घर ले के आ गया

–अमरनाथ राय जब आदमी अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ करता है तो परिणाम के प्रतिकूल होने पर भी उसे आत्मसंतोष की प्राप्ति होती है।लेकिन तब, जब कार्य कर्त्तव्य बोध के साथ किया गया हो।परिणाम की प्राप्ति की कामना या आदेश-निर्देश के अनुपालन में नहीं।आदेश-निर्देश के अनुपालन में किया गया कार्य अंदर से […]

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जन्म-शताब्दी वर्ष : फणीश्वरनाथ रेणु के लेखन में लोकजीवन और संस्कृति की रंग-बिरंगी छवियाँ हैं..

–राकेश रेणु फणीश्वरनाथ रेणु के लेखन में लोक की, उनके जीवन और संस्कृति की तरह-तरह की रंग-बिरंगी छवियाँ हैं। वह मानवीय संवेदनाओं के अतुल्य चित्रकार हैं लेकिन वे केवल मनोजगत के कथाकार नहीं, बल्कि बाह्य जगत की घटनाओं के, त्रासदियों और खुशियों के लेखक हैं जो मनुष्य के बाहरी-भीतरी दोनों भावलोकों को प्रभावित करती है। […]

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पुस्तक समीक्षा : इश्केमज़ाजी का एक चेहरा इश़्केहक़ीक़ी भी होता है ,

-सीमा संगसार बहुत दिनों के बाद एक ऐसी पुस्तक हाथ में लगी जिसने पढ़ने में काफी वक्त लिया। वह इसलिए नहीं कि दुरुह थी या बोझिल था इसे पढ़ना , दरअसल पहली बार मुझे एक पुस्तक का साथ इतना भाया कि इच्छा ही नहीं हो रही थी कि मैं इसे जल्दी खत्म करके इससे अलग […]

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शब्दों के बीच घुलता है मौन….और प्रेम इन सबसे परे है

व्हेयर इज़ डैन ❤️ शब्दों के बीच घुलता है मौन और प्रेम इन सबसे परे है …. शब्द, मौन और जीवन के सभी दृश्य व अदृश्य भावों से परे …. एक प्रेमी को प्रेम करना नहीं प्रेम हो जाना होता है … अक्टूबर के माह में जिस समय हल्की शीत से वातावरण में सनसनाहट होती […]

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जयंती विशेष : विश्व साहित्य के सृष्टा : महापंडित राहुल सांकृत्यायन और आजमगढ़

जगदीश बरनवाल ‘कुंद’ .आजमगढ़। आज 9 अप्रैल 2020 को महापंडित राहुल सांकृत्यायन का 128 वां जन्मदिन है । विगत कई वर्षों से उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके पितृ-ग्राम कनैला एवं जन्म ग्राम ननिहाल पंदहा के साथ ही जनपद के विभिन्न भागों एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी संस्थानों, संगठनों के माध्यम से आयोजन होते रहें […]

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