हमारे समय में दो अदभुत नाट्य आयोजनों के बहाने आजमगढ़ की सांस्कृतिक बैरोमीटर को महसूस तो करिए जनाब!

@अरविंद सिंह कल दो अदभुत दृश्य देखने को मिले। पहला दृश्य हमारे समय का, हमारे जनपद का रंग क्षेत्र का सबसे उम्मीद भरा युवा चेहरा अभिषेक पंडित और उनके सूत्रधार का रंग महोत्सव यानि फिल्म फेस्टिवल। मंच पर फिल्म ‘जेड प्लस’ के लेखक रामकुमार सिंह और रंगकर्मी अभिषेक पंडित के बीच फिल्म और संवाद लेखन […]

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दुनिया जितनी बूढ़ी होगी,गांधी उतने ही नौजवान होते जाएंगे

बड़े देश मे छोटे मन के निवासियों को कोयल की कुक बहुत अच्छी लगती है।क्यो अच्छी लगती है?यह वह नही जानते,न समझते है।सम्भवतः इस लिए अच्छी लगती हो कि उनके आसपास कौवों की भरमार है। भले कौवा कठोर भाषा मे कोयल से बड़ी बात कहता हो,और कोयल मधुर शब्दों में गाली बकती हो,अर्थात सवाल समझने […]

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यशवंत सिंह, जिस वैचारिक सत्ता की विरासत हैं, उसने भारतीय राजनीति में बेखौफ़ इंदिरा की तानाशाही का विरोध किया था…

जन्मदिन_पर_विशेष। शार्प रिपोर्टर। @अरविंद सिंह जिस कालखंड में हमारी पीढ़ी की सियासी समझ और राजनीतिक चेतना का विस्तार हो रहा था, और नेताओं के दृश्य और अदृश्य चुंबकीय व्यक्तित्व एवं आभा मंडल के ज़द में जाने का दौर,एक परंपरा का रूप लेता जा रहा था। जिस व़क्त जेपी की ख़ुमारी और नशे के भावनात्मक वाष्प […]

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इतिहास की महत्वपूर्ण करूण गाथा रुस्तम और सोहराब

रामाधीन सिंह *******************#फारसी के कालजयी ऐतिहासिक साहित्यकार फिरदौसी तथा पहलवान रुस्तम तथा उनके पुत्र सोहराब के नाम से सभी लोग परिचित ही हैं ।**** 35 वर्ष की सतत साधना से इस महान ग्रन्थ की रचना में #इस्लाम के #पहले के #फारस देश के महान योद्धाओं का वर्णन और #इतिहास सुरक्षित कर रखा है — फिरदौसी […]

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एक देश एक भाषा पर इतना बवाल क्यों ?

–Hemant Sharma कल हिंदी दिवस बीत गया। मैं हिंदी को किसी एक दिन के दायरे में बांधने के पक्ष में कभी नही रहा। मेरे जेहन में ये सवाल हमेशा ही दस्तक देता आया है कि आखिर ये हिंदी दिवस मनाने की जरूरत क्यों आन पड़ी? दिवस तो उसके होते हैं जो साल में एक बार […]

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नमस्कार! मैं रवीश कुमार……शंभूनाथ शुक्ल !

-Pawan karan मैंने रवीश कुमार के साथ कई बार लंबी बैठकें कीं और उनसे कोई ‘क्रांतिकारी’ चर्चा करने की बजाय इस व्यक्ति को करीब से देखने और समझने का प्रयास किया। गाजियाबाद के वैशाली इलाक़े में स्थित एक अपार्टमेंट के ग्यारहवें माले के जिस फ़्लैट में वे रहते हैं, वह असाधारण सिर्फ इस मामले में […]

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मार्क्स,लेनिन, चेग्वेरा और भगत सिंह…

–अंबरीश कुमार की फेसबुक वाल से कुछ साल पहले एक एक्टिविस्ट सीमा आजाद को दिल्ली के पुस्तक मेले से खरीदी कुछ पुस्तकों के साथ इलाहबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया .हमने जनसत्ता में कुछ खबरें की .पुलिस के एक आला अफसर का फोन आया बोले ,आप क्यों इनको शाह दे रहे हैं .आपकी खबर के चलते […]

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आज सुप्रसिद्ध लेखिका तसलीमा नसरीन का जन्म दिन है

तसलीमा नसरीन के जन्मदिवस पर विशेष :- ‘लज्जा’ बांग्लादेश की बहुचर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन का पाँचवाँ उपन्यास है। इस उपन्यास ने न केवल बांग्लादेश में हलचल मचा दी है, बल्कि भारत में भी व्यापक उत्ताप की सृष्टि की है। यही वह उत्तेजक कृति है, जिसके लिए लेखिका को बांग्लादेश की कट्टरवादी साम्प्रदायिक ताकतों से सजा-ए-मौत […]

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वरिष्ठ सोशलिस्ट पहुंचे मुबारकपुर,पूछे फजलुलरहमान की कुशलक्षेम

सोशलिस्ट पार्टी के विचारधारा से प्रेरणा लेकर समाजवादी विचारधारा पंथनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित फजलुल रहमान मुबारकपुर से सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं। प्रख्यात समाजवादी विचारक,ईमानदारी के पर्याय विजयनारायण जी एस अब्दुल बारी और समाजवादी नेता डॉ० ज्ञानप्रकाश दुबे विगत दिनों रहमान जी से मिलने और देखने उनके […]

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अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले शूरवीर फतेह बहादुर शाही को याद रखिए, भले ही इतिहासकारों ने उन्हें भुला दिया

@ गोपाल जी राय/वरिष्ठ पत्रकार व लेखक जब जब भारत में स्वतंत्रता संग्राम के मूर्त-अमूर्त वीरों की गाथा गाई जाती है, तब तब भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ‘प्रथम उद्घोषक’ रहे महानायक फतेह बहादुर शाही की याद सबसे पहले आती है। क्योंकि इतिहास में उनके नायकत्व और जुझारूपन को वह स्थान नहीं मिला, जिसके वह पात्र […]

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