अगर तुम हो सावन तो मैं प्यासी नदी हूं’!

–अभिषेक प्रकाश – “विद्या कल फिर से बारिश होने वाली है। -तो मैं अपना छाता लाऊंगी! -तो चलो फिर मैं अपना नही लाता !” लेकिन आपने तो मौका ही नही दिया! न आप आई और न बारिश की बूंदे ! वह गीत अभी भी गूंज रहा है जिसमें आप कहती हैं कि ‘अगर तुम हो […]

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हिंदू की बिरयानी

-अंबरीश कुमार अपने ज्यादातर हिंदू मित्र घनघोर किस्म के मांसाहारी हैं जबकि कई मुस्लिम शुद्ध शकाहारी हैैं .ताहिरा हसन से लेकर वजिहा तक .इन लोगों के साथ जब भी दावत आदि का कार्यक्रम बनता है तो बड़ा ध्यान रखना पड़ता है .मांसाहारी व्यंजनों पर अमूमन लिखने से बचता हूं क्योंकि कई लोग बहुत कुढ़ते भी […]

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अलमस्त फकीर : अमीर खुसरो

तीर , तलवार , दरबार , सरकार से हटकर भी एक ऐसी दुनिया है इस जहांन में जहा सिर्फ हर ओर एक नगमा है प्यार का हर सांसो का एक एहसास है , एक ऐसी रूहानी दुनिया जहा सिर्फ मुहब्बत है प्यार है और उस प्यार में खोने का कोई एहसास नही बस समर्पण है […]

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भारत छोड़ो आंदोलन में काशी की पत्रकारिता

-KDN Rai स्वतन्त्रता आंदोलन में पत्रकारिता जनमानस को दृष्टि, दिशा और शक्ति प्रदान करती थी। स्वतन्त्रता आंदोलन के प्रायः सभी बड़े नेताओं के अपने पत्र थे और पत्रकारिता के माध्यम से ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जनमत तैयार किया जाता था। सत्ता की चाटुकारिता करने वाले तब भी थे। जो नही थे, उनके अखबार बन्द हो […]

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लखनऊ की ओम कुमारी सिंह नई दिल्ली में वीमेन अचीवर्स अवॉर्ड 2019 से सम्मानित

लखनऊ। राजधानी निवासी पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती ओम कुमारी सिंह का नई दिल्ली में शनिवार को सम्मान किया गया। ओम कुमारी सिंह चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं। वह जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण, योग और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए काम करती हैं। लीगल राइट्स काउंसिल ऑफ इंडिया और सीपीडीएचई दिल्ली विश्वविद्यालय की […]

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परमवीर अब्दुल हमीद की बेवा रसूलन बीबी नहीं रहीं..

सन् 1965 की लड़ाई के नायक, परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद की बेवा रसूलन बीबी नहीं रही। उम्र के आखिरी पड़ाव में 93 बसंत देख चुकी रसूलन बीबी,अंतिम सांस धामपुर में लीं। उस महान नायक की पत्नी का साक्षात्कार लेने का अवसर ‘शार्प रिपोर्टर’ को भी कोई एक दशक पहले उनके गाजीपुर नगर स्थित आवास […]

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बनरसी कौवा

बनरसी कौवा: एक रही गौरइया। बप्पुरी नाव रहा। गौरइया जब जब अंडा देय तब तब ओकर अंडा एक कौवा आइ कै खाइ जाय। कहाँ नान्ह भर कै गौरइया !कहाँ भूत अस बनरसी कौवा !! बेचारी गौरइया कहाँ मोकाबिला करत। यहि कारन ऊ बहुत दुखी रहै लाग। मनै मन अब ऊ जुगत सोचै लाग कि ‘कइसै […]

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महिला किसानों के श्रम,सौंदर्य,मस्ती,साहस का गीत

मोती बीए जन्मशताब्दी पर विशेष : चंदन तिवारी के फेसबुक वाल से लहs-लहs धान करे, फहर सारीचली रे गुजरिया के खुरपी पियारीचली रे संवरिया के फरूहा कुदारीचलs चलीं बैलन के ले लीं बलइयासनन सनन सन, सनन सनन सनबाउर जे ताकी त आंख फुट जाईदुश्मन के छाती के हाड़ टुट जाईहोखे कुछ भाखल त ठान ल […]

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आप माधुरी दीक्षित के इतने दीवाने क्यों है ?

आप को मकबूल फ़िदा हुसैन साहब के बारे मे एक दिलचस्प बात बताऊँ, एक मुलाकात मे मैंने उनसे पूछा कि आप माधुरी दीक्षित के इतने दीवाने क्यों है ? उन्होंने जो ज़बाब दिया वह इतना मार्मिक था कि मेरी आँखें भर आयी. उन्होंने कि “मेरी वाल्दा मेरे बचपन मे ही दुनिया छोड़ गयी थी, मुझे […]

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कजरी : लोक-संस्कृति की लय है

  -कृष्ण कुमार यादव भारतीय परम्परा का प्रमुख आधार तत्व उसकी लोक-संस्कृति है। यहाँ लोक कोई एकाकी धारणा नही है बल्कि इसमें सामान्य-जन से लेकर पशु-पक्षी, पेड़-पौधे, ऋतुएँ पर्यावरण हमारा परिवेश और हर्ष निषाद की सामूहिक भावना से लेकर श्रंृगारिक दशाएँ तक शामिल हैं। ‘ग्राम-गीत’ की भारत में प्राचीन परंपरा रही है। लोक-मानस के कंठ […]

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