एमवी इफेक्ट : ट्रैफिक पुलिस का व्यवहार बना एक नौजवान के हार्टअटैक का कारण

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– पंकज चतुर्वेदी
इनकी उम्र 35 साल थी। एक बच्ची है छह साल की। लेकिन सड़क का तनाव उन्हें खा गया।ट्रैफिक पुलिस के साथ चालान काटने के बारे में बहस करते हुए नोएडा में इस सॉफ्टवेयर कंपनी के कर्मचारी की सड़क पर ही दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई है. इनका नाम गौरव शर्मा था। वे अपनेमाता-पिता के साथ नोएडा के सेक्टर -62 में रहते थे . इस मामले में गौरव के पिता जो घटना के समय उनके साथ ने बताया कि ट्रैफिक सिपाही ने उन्हें रोकने के लिए उनकी कार में लाठी मारी और इसके बाद गौरव और पुलिस के बीच गरमागरम बहस हुई. इसके साथ ही गौरव के परिवार ने पुलिस पर भी गर्म बहस के दौरान अभद्र भाषा का उपयोग करने का आरोप लगाया.
जानकारी के अनुसार गौरव पुलिस से बहश के दौरान अचानक होश खो बैठे और जमीन पर गिर पड़े. इसके बाद उसकी मदद करने के बजाय पुलिस यह सब देखकर वहां से भाग गई ।
मौजूद लोगों की मदद से गौरव को फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने इसका इलाज करने से मना कर दिया। और फिर कैलाश अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. परिवार ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की है, गौरव अकेले ही अपने घर को चला रहे थे. वह नोएडा में अपने बुजुर्ग माता-पिता के अलावा अपनी पत्नी और छह साल की बेटी का पालन-पोषण कर रहे थे. गौरव नोएडा में एक सॉफ्टवेयर कंपनी के मार्केटिंग विभाग में काम करते थे.
सड़क सुरक्षा का मैं समर्थक हूँ। कानून भी कड़े हों लेकिन मैंने दुनिया के कम से कम 12 देशों में सड़क पर ट्रेप लगा कर लोगों को पकड़ते नहीं देखा। सड़क पर ट्रैफिक वाले दिखते नहीं।
हमारे यहां रेड लाइट पर भी चार पुलिसवाले दिखते है। जाहिर है कि उन्हें अपनी जेब भरने की चिंता रहती है।

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