विधानसभा चुनाव 2019: महाराष्ट्र में बागियों के कारण दलों में बेचैनी

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महाराष्ट्र में सभी राजनीतिक दल, विशेष रूप से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पाटीर्-शिवसेना के बीच बेचैनी का माहौल है, क्योंकि 288 विधानसभा क्षेत्रों के लिए 21 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में बागी नेता कई निवार्चन क्षेत्रों में अधिकृत उम्मीदवारों की जीत की संभावनाओं पर पानी फेर सकते हैं।

जहां कुछ दलों ने उन्हें ‘साम या दाम’ से दूर करने की कोशिश की। वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चेतावनी दी है कि अगर बागी चुनावी मैदान से नहीं हटे तो ‘उन्हें उनकी जगह दिखा दी जाएगी’। लेकिन कई बागी नेताओं पर इस चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ है।

भाजपा-शिवसेना के अलावा, यहां तक कि विपक्षी कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पाटीर् (राकांपा) भी बागियों पर नकेल कसने को लेकर सिर खपा रही है, जो सभी पक्षों के लिए दोधारी तलवार की तरह काम कर सकते हैं।

एक तरफ, बागी नेता अधिकृत उम्मीदवारों की जीत की संभावनाओं में रोड़ा अटका सकते हैं या विरोधियों को लाभ पहुंचा सकते हैं, तो वहीं कुछ मामलों में यह भी संभावना है कि वे कहीं-कहीं अपनी व्यक्तिगत पकड़ के कारण जीत भी हासिल कर सकते हैं।

भाजपा-शिवसेना पहले 27 से अधिक निवार्चन क्षेत्रों में 11० बागियों का सामना कर रही थी। इसके अलावा लगभग 2० सीटों पर कांग्रेस-राकांपा को इस स्थिति से दो-चार होना पड़ा है और करीब आधा दर्जन सीटों पर आधिकारिक गठबंधन भी एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं।

लेकिन, भाजपा-शिवसेना अभी भी कम से कम 3० सीटों पर विद्रोहियों का सामना कर रही हैं, और कांग्रेस-राकांपा ने बागी नेताओं को समर्थन देकर उनका फायदा उठाने की कोशिश की है।

कुछ निवार्चन क्षेत्रों में, विपक्ष का राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिमार्ण सेना (मनसे) के साथ सुविधाजनक, लेकिन अनौपचारिक रूप से समझौता हो गया हैं, जिसके उम्मीदवार भाजपा-शिवसेना के प्रत्याशियों के वोटबैंक में सेंध लगा सकते हैं।

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