वरिष्ठ पत्रकार राजीव ओझा को ‘जर्नलिस्ट आफ पैशन एवार्ड’

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 –अमरजीत राय

इंटीग्रेटेड सोसायटी आफ मीडिया प्रोफेशनल्स लखनऊ द्वारा गांधी आडिटोरियम कैसर बाग लखनऊ मे आयोजित मीडिया नेशनल सेमिनार मे वरिष्ठ पत्रकार राजीव कुमार ओझा को उनकी मूल्य आधारित पत्रकारिता के लिये मुख्य अतिथि पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.राजेश सिंह ने जर्नलिस्ट आॅफ पैशन एवार्ड का सम्मान पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस सेमिनार मे केन्द्रीय विश्वविद्यालय रांची झारखंड के पत्रकारिता एवं जनसंचार के विभागाध्यक्ष प्रो.संतोष तिवारी , इंटीग्रेटेड सोसायटी आफ मीडिया प्रोफेशनल्स के चेयरमैन चंद्रशेखर, दूरदर्शन के एडीजी डा.एस .के.ग्रोवर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो.धीरेन्द्र राय ,केन्द्रीय विश्वविद्यालय वर्धा के जनसंपर्क अधिकारी बी.एस.मिर्गे,महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के डा .अनिल उपाध्याय( विभागाध्यक्ष पत्रकारिता एवं जनसंचार),डा.मनोज यादव, एस.पी.जी.आई. लखनऊ की जनसंपर्क अधिकारी मोनालिसा चौधरी अधिकारी जैसे विद्वानों ने शिरकत की।
व्याख्यान सत्र मे सोशल मीडिया की उपयोगिता विषयक व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए श्री ओझा ने कहा कि मीडिया और सोशल मीडिया एक दूसरे के पूरक हैं । मिशन से शुरू हुई पत्रकारिता एक कालखण्ड तक प्रोफेशन पर टिकी रही पेड न्यूज से शुरू हुआ पतन का सिलसिला आज जिस मुकाम पर पहूंचा है उसने मीडिया पर जनता के भरोसे को तोड़ा है ।आज एक नैराश्य का भाव स्पष्ट देखा जा सकता है।सोशल मीडिया प्लेटफार्म पारंपरिक मीडिया की मौजूदा भूमिका से उत्पन्न शून्य को भरने का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है बशर्ते हम इस प्लेटफार्म का उपयोग अफवाह फैलाने, हेट न्यूज, फेक न्यूज फैलाकर समाज खास कर देश के युवा मानस को नष्ट करने के लिये न करें ।श्री ओझा ने कहा कि 2013 के बाद मीडिया और सोशल मीडिया के नये अवतार से हम मुखातिब हैं।हेट और फेक न्यूज के सहारे सत्ता बदलने का सियासी खेल कुछ अपवादों को छोड़ कर पारंपरिक मीडिया और सोशल मीडिया ने 2014 के लोकसभा चुनाव मे खुल कर खेला।यह सिलसिला बदस्तूर जारी है।सोशल मीडिया मे अमृत और विष दोनों तत्व मौजूद हैं यह हमारी ग्राह्यता पर निर्भर है कि हम किस तत्व को ग्रहण करते हैं।सोशल मीडिया का जैसा दुरूपयोग सियासी दलों के पेड आईटी सेल ने शुरू किया है वह लोकतंत्र के लिये शुभ संकेत नहीं है।विकसित तकनीक के इस दौर मे पारंपरिक मीडिया और सोशल मीडिया के नकारात्मक उपयोग से निपटने की गंभीर चुनौती हम सभी के समक्ष खड़ी है। हमे ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी जो देश , समाज और लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करने के हेट और फेक न्यूज के खेल पर अंकुश लगा सके।

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