बिना UPSC सिविल सेवा परीक्षा दिए सीधे ज्वॉइंट सेक्रेटरी बनाने वाली लेट्रल एंट्री पर बोले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कही अहम बात

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यूपीएससी लेटरल एंट्री ( upsc lateral entry ) पर पीएम मोदी ने कहा- ‘एक IAS सारी दुनिया जानता है, यह सोच ठीक नहीं है। समाज में बहुत प्रतिभावान लोग होते हैं। इतना बड़ा देश चलाने के उन्हें भी सेवा देने का अवसर मिलना चाहिए। उन्हें अवसर देने के लिए हमने यूपीएससी की मदद से काफी संगठित तरीके से एक मैकेनिज्म बनाया है। 1-2 करोड़ रुपये का पैकेज लेने वाले नौजवान अपनी कॉरपोरेट जॉब छोड़कर सरकारी व्यवस्था में आने के तैयार हो रहे हैं। सरकार को उनके कॉरपोरेट वर्ल्ड का अनुभव का फायदा मिल रहा है। गवर्नेंस और गवर्नमेंट के साथ जुड़ने के बाद वो ज्यादा वेल्यू एडिशन कर पा रहे हैं। देश का बेहतरीन टेलेंट, जो आज सिविल सेवा की तय भर्ती प्रक्रियाओं का हिस्सा नहीं है, वो देश के दूसरे बेस्ट संस्थानों की अच्छी वेल्यू का संचार सरकारी विभागों में करेंगे।

हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कॉरपोरेट कल्चर की कुछ चीजें अच्छी है, उनका सरकार में आना अच्छी बात है। होनी चाहिए। इन्हीं के माध्यम से हम ला पाएंगे।

क्या है upsc lateral entry 
आमतौर पर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित की जाने वाली सिविल सेवा परीक्षा, वन सेवा परीक्षा या अन्य केंद्रीय सेवाओं की परीक्षा में चयनित अधिकारियों को करियर में लंबा अनुभव हासिल करने के बाद संयुक्त सचिवों के पद पर तैनात किया जाता है। लेकिन मोदी सरकार ने लेट्रल स्कीम की शुरुआत की है। इस स्कीम के जरिए प्राइवेट सेक्टर के एक्सपर्ट्स को सीधे मंत्रालयों में जॉइंट सेक्रटरी के पद पर नियुक्त किया जा रहा है। अप्रैल माह में देश में पहली बार निजी क्षेत्रों के नौ विशेषज्ञों को केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में संयुक्त सचिव के पदों पर तैनाती के लिए चुना गया। कार्मिक मंत्रालय ने पिछले साल जून में ‘सीधी भर्ती व्यवस्था के जरिए संयुक्त सचिव रैंक के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इन पदों के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2018 थी।  इससे संबंधित सरकारी विज्ञापन सामने आने के बाद कुल 6,077 लोगों ने आवेदन किए थे।

हिन्दुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट 2019 में पीएम मोदी ने कहा कि हम सिविल सेवा अधिकारियों की कार्यशैली में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। इस दिशा में अहम पहल की गई है। सिविल सेवा अधिकारी की नियुक्ति के शुरुआती दिनों में ही उन्हें अनुभव दिया जा रहा है कि पॉलिसी लेवल पर कैसे काम किया जाता है। फ्लैक्सी स्कीम को कैसे फॉलो किया जाता है। पहले उन्हें ऐसा अनुभव नहीं मिलता था।

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