बंद खिड़की तो खोलनी हीं होगी,ताजा हवा रोशनदान से नहीं आएगी

India News Jammu and Kashmir

-Ajay srivastav
अभी कुछ दिनों पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार(NSA)एक गुप्त मिशन पर जम्मू-कश्मीर जातें हैं और वे वहाँ के लिए एक फुल प्रुफ योजना तैयार कर गृहमंत्रालय को सौंपते हैं।उनकी रिपोर्ट के अनुसार गृहमंत्रालय जम्मू-कश्मीर में CRPF की 50,BSF की 10, SSB की 30 और ITBP की 10 कंपनियों को तैनात करेगी।दरअसल सरकार जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।जहाँ तक मैं समझता हूँ राज्य को बाहरी खतरों से ज्यादा आंतरिक शक्तियों से लड़ने के लिए अतिरिक्त फोर्स की आवश्यकता है।जम्मू-कश्मीर पुलिस बहुत से मौकों पर बिल्कुल बेबस सी हो जाती है क्योंकि आतंकियों ने अब उनके परिवार पर हमला करना शुरू कर दिया है।कोई भी पुलिसकर्मी नौकरी के लिए अपने परिवार की जान को जोखिम में डालना नहीं चाहता, इस वजह से भी अतिरिक्त केन्द्रीय बलों की जरूरत महसूस की गई है।
केन्द्र सरकार अब जम्मू-कश्मीर में अपना एजेंडा लागू करने जा रही है,केन्द्र सरकार धारा 370,आर्टिकल 35(A) पर गंभीर है।
मोदी सरकार ने इन विवादित कानून को समाप्त करने के लिए वहाँ के अलगाववादी नेताओं के पाकिस्तान कनेक्शन पर नकेल कस दी है।हवाला के जरिए पाकिस्तान से पैसा भारत में इनके पास आता था जिससे वे नौजवान लड़को को सेना पर पत्थरबाजी के लिए उकसाते थे।स्थानीय लड़कों को विभिन्न प्रकार के प्रलोभन देकर आतंक के रास्ते पर डाला जाता था।NIA की विस्तृत जाँच में पता चला है कि सभी हुर्रियत कांफ्रेंस के छोटे-बड़े नेता करोडपति हैं और उनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं।NIA ने अलगाववादियों के बेनामी संपत्ति को जब्त करना शुरू कर दिया है, जम्मू-कश्मीर के अलावा दिल्ली, मुंबई में इनके बेनामी संपत्तियों का पता चला है।सरकार की निगाहें इनके द्वारा संचालित ट्रस्ट,मदरसे और मस्जिदों पर है जिनकी आड़ में वे विदेशों से मोटा चंदा लेते हैं और अपनी प्रापर्टी बनाते हैं।
आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान और अलगाववादी नेता ये नेता नहीं चाहते हैं कि बदलाव की बयार बहे,वहाँ के बच्चे आधुनिक शिक्षा प्राप्त करें।अगर बच्चे पढ़ लिख लेगें तो अपना अच्छा बुरा समझने लगेंगे, फिर इन जाहिलों को कौन पुछेगा।वे किसी भी हालत में आर्टिकल 35(A) को खत्म करना नहीं चाहते।जम्मू कश्मीर में किसी के पास ज्यादा पैसा नहीं है कि वो वहाँ उद्योग लगा सके।किसी भी प्रदेश के विकास के लिए कल-कारखानों का होना बेहद जरूरी है जो वहाँ नगण्य है।आर्टिकल 35(ए) के प्रावधानों के अनुसार कोई बाहरी वहाँ जाकर बस नहीं सकता, जमीन नहीं खरीद सकता,फिर विकास की बात तो बेमानी हीं है।
केन्द्र सरकार ने आर्टिकल 35(ए) को हटाने के लिए कमर कस ली है जो जम्मू-कश्मीर को एक खास तरह के सिंडिकेट से मुक्त कराने के लिए बेहद जरूरी है और नागरिकों के हित के लिए, उसके सामाजिक, आर्थिक स्तर को ऊँचा उठाने के लिए बेहद जरूरी है।
मुझे पूरी उम्मीद है दूनिया की जन्नत कहे जाने वाली कश्मीर में एक नया सवेरा होगा,वहाँ के लोग भारत के अन्य राज्यों के लोगों के साथ काम करेंगे, साथ रहेंगे लोगों की संस्कृति को आत्मसात करेंगे तभी राज्य का और उनका सर्वांगीण विकास संभव होगा।

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1 thought on “बंद खिड़की तो खोलनी हीं होगी,ताजा हवा रोशनदान से नहीं आएगी

  1. आर्टिकल 35A जम्मू कश्मीर की संस्कृति और डेमोग्राफी की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। ऐसा प्रावधान कई अन्य राज्यों में भी है। संविधान के पार्ट 5th में ऐसे सुरक्षात्मक प्रावधान किए गए है। आर्टिकल 35 A जम्मू कश्मीर के विकास का बाधक नही है, बल्कि विशेष राज्य होने के कारण उसको प्रोटेक्ट हासिल है।
    रही बात धारा 370 की तो वो भी अब नाममात्र की बची है. कई नियम-प्रावधान समय समय पर अलग अलग केंद्रीय सरकारों ने उस धारा को संशोधित किया, जिससे अब वह बिना दांत-नाखून का।बचा हुआ है.
    दरअसल समस्या 370 या धारा 35 A नही है. प्रॉब्लम है सरकारों की इच्छाशक्ति की चाहे वह केंद्रीय सरकार की हो या राज्य सरकार की

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