नज़रिया : सोशल मीडिया पर कैसी कैसी बहसे चल रहीं हैं धारा 370 पर

Debate India News Jammu and Kashmir

-दयानंद पांडेय की कलम से
मैं डंके की चोट पर देशभक्त हूं , समझता हूं कि आप सभी हैं । सेक्यूलर होना ज़रूर आज की तारीख में गाली हो गया है । सिर्फ़ , भारत में ही नहीं , पूरी दुनिया में । अमरीका , चीन , फ़्रांस जैसे देशों ने इस्लामिक आतंकवाद के मद्देनज़र , मुस्लिम तुष्टिकरण वाले इस सेक्यूलरिज्म को पूरी ताकत से डस्टविन में डाल दिया है । इस को गाली बना दिया है । लेकिन देशभक्त होना दुनिया में कहीं भी गाली नहीं है । हां , जब से नरेंद्र मोदी भारत के प्रधान मंत्री हुए हैं तो कुछ ख़ास पाकेट के लोगों ने नरेंद्र मोदी की नफ़रत में बीमार हो कर देशभक्त को गाली बताने का काम बड़ी बेशर्मी से करना शुरू किया है । इन बीमार लोगों को जानना चाहिए कि यह देश सिर्फ़ एक नरेंद्र मोदी का नहीं है । हम सब का है ।

आप को अपनी नफ़रत में डूब कर , देशभक्त कहलाने में शर्म आती है तो शर्माइए अपनी बला से लेकिन हम आप को देशभक्त को गाली वाला शब्द नहीं बनाने देंगे । पूरी ताकत से आप की इस नाज़ायज हरकत का विरोध करेंगे , आप की सख्त निंदा करते हैं इस मूर्खता और धूर्तता के लिए । आप को अपने पिता पर , अपने पुरखों पर , अपने देश पर शर्म आती है तो , यह आप की बीमारी है । हो सके तो इस का इलाज कीजिए । लेकिन हर किसी पर अपनी इस बीमारी का छुआछूत फैलाना बंद कीजिए ।

और जो यह सब गलत लगता है तो आप बने रहिए गद्दार , किसी डाक्टर ने कहा है कि देशभक्त बनिए । क्यों कि आप की राय में तो देशभक्ति गाली है , हिटलर के समय से है । और कि आप की राय में यह देश सिर्फ़ भाजपाइयों का है , वही देशभक्त हैं , वही देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटते फिरते हैं । आप को किसी से सर्टिफिकेट भी नहीं चाहिए । तो आप की इस धूर्तता भरी मूर्खता का इलाज सिर्फ़ वामपंथी देश चीन में ही मुमकिन है , भारत में नहीं । आप को नहीं मालूम तो जान लीजिए संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में कुल 30 लाख मुसलमानों को नज़रबंद कर इस्लामिक कट्टरपंथी छुड़वा कर , देशभक्ति का पाठ पढ़ाया जा रहा है । कम्युनिस्ट पार्टी और शिन चिफिंग के नारे लगवाए जा रहे हैं ।

ए पी न्यूज़ एजेंसी के हवाले से अख़बारों में एक बड़ी ख़बर है कि चीन ने 10 लाख उइगर मुसलमानों को कट्टरवाद विरोधी गुप्त शिविरों में बंद कर रखा है । जब कि 20 लाख मुसलमानों को इस्लामिक विचारधारा बदलने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। ख़ास बात यह कि यह उइगर मुसलमान चीन के पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में बहुसंख्यक हैं । और चीन ने इस प्रांत को स्वायत्त घोषित कर रखा है । इन शिविरों में मुसलमानों से जबरन कम्युनिस्ट पार्टी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की वफ़ादारी की कसम दिलाई जाती है और इन के पक्ष में नारे भी लगवाए जाते हैं । संयुक्त राष्ट्र की नस्ली भेदभाव उन्मूलन समिति ने उइगर मुस्लिमों के साथ किए जा रहे इस भेदभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की है । समिति की उपाध्यक्ष गे मैक्डोगॉल ने कहा है , सामाजिक स्थिरता और धार्मिक कट्टरता से निपटने के नाम पर चीन ने उइगर स्वायत्त क्षेत्र को कुछ ऐसा बना दिया है जो गोपनीयता के आवरण में ढंका बहुत बड़ा नज़रबंदी शिविर जैसा है । घर में क़ुरान रखने ,दाढ़ी रखने , टोपी या बुरका पहनने, रोजा रखने और ताबूत में रख कर शव दफनाने पर पूरे चीन में प्रतिबंध पहले ही लग चुका है । अपने खर्च पर शव को जलाने का आदेश है ।

लेकिन इस खौफनाक खबर पर भारत के मुसलमान ख़ामोश हैं । समूचा सेक्यूलर गैंग ख़ामोश हैं । सोशल साईट पर भी लंबी चुप्पी है । न्यूज़ चैनल आदि ने भी चीख-पुकार नहीं मचाई । गोया कुछ हुआ ही न हो । लेकिन अगर इसी तरह भारत में कट्टरता के ख़िलाफ़ कोई क़दम उठाया जाए तो ? तब क्या यही गहरी ख़ामोशी कायम रहेगी ? क्यों कि कट्टरता तो कट्टरता होती है । और अगर यह कट्टरता देश हित के ख़िलाफ़ जाती है तो इस पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए । भारत में कश्मीर सहित कुछ ऐसी ही जगहें हैं जहां धार्मिक कट्टरता के चलते ही स्थितियां काबू से बाहर हो चुकी हैं । बहुत हो चुकी नरमी । चीन की ही तरह पूरी सख्ती से इन कट्टरपंथियों से निपटने की ज़रूरत है ।

वरिष्ठ साहित्यकार अपूर्व जोशी का कमेंट :-

पांडे जी! आपके आलेख से ऐसा प्रतीत होता है कि आपने नई थोरम इजाद की है नरेंद्र मोदी को समर्थन इज इक्वल टू देश भक्ति बंधु इससे मैं नहीं हूं नरेंद्र मोदी केस गुजरात में मुख्यमंत्री रहते जो कुछ हुआ चाहे वह सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति जैसों का फेक एनकाउंटर हो या फिर जाकिया जाफरी और गुलबर्ग सोसायटी का मामला हो या फिर ढेर सारे निर्दोष एक कॉम विशेष का मारा जाना हो या फिर गोधरा में कारसेवकों की हत्या हो सभी कुछ याद कर हमें नरेंद्र मोदी का समग्र विश्लेषण करना चाहिए यह भी नहीं भूलना चाहिए कि उनके राजमें नोटबंदी का ऐलान भारत की आर्थिक नीव को तोड़ने का कारण बना बेरोजगारी चरम पर है राफेल डील पर बहुत कुछ ऐसा है जिसका स्पष्टीकरण नहीं दिया जा रहा है देश का मुख्य न्यायाधीश लोकतंत्र खतरे में है कह रहा है बहुत कुछ है जिस पर चिंतन मंथन की आवश्यकता है हां जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने के सिवा मेरी समझ से भारत सरकार के पास कोई विकल्प नहीं इसलिए उसका समर्थन जरूरी है साथ ही ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर भी मैं नरेंद्र मोदी सरकार के साथ हूं उन्हें चाहिए जैसे लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 1829 में सती प्रथा को हिंदू धर्म से पृथक किया था ठीक उसी प्रकार कन्यादान पर भी रोक लगनी चाहिए मुस्लिम धर्म में हलाला जैसी कुप्रथा पर भी रोक लगनी चाहिए रही बात देशभक्ति की तो मात्र इसलिए की एक धर्म विशेष को वर्तमान सरकार नाना प्रकार से अपने एजेंडे के अनुसार आगे बढ़ा रही है करोड़ों रुपए फूंक कर कांवरियों को सुविधाएं दी जा रही हैं तो यदि यह देश भक्ति है तो दया शंकर जी मैं तो करते देशभक्त नहीं हूं जय राम जी की सलाम वालेकुम

शिवसेना रैना का कमेंट :-

कतिपय ‘तथाकथित सेक्युलरिस्ट’ कश्मीरी पंडितों ने धारा 370 हटाये जाने के विरोध में एक वक्तव्य जारी किया है।ये वही लोग हैं जो हर हमेशा लाभ के पदों पर रहे हैं और पण्डितों के विस्थापन का दंश इन्होंने कभी झेला नहीं।दिल्ली-मुम्बई या अन्य बड़े शहरों में ही हमेशा रहे और पूर्व सरकारों के समर्थक रहे।
विस्थापित पण्डितों से हमदर्दी रखने वाले देशभक्त कश्मीरी-गैर कश्मीरी इन पर थूक रहे हैं और भद्दी-भद्दी गालियां निकाल रहे हैं।लोगों का कहना है कि कहीं ये लोग वहां की सरकार के पेरोल पर या फिर उनके पिट्ठू तो नहीं हैं?सेकुलरिज्म के क़ीडे से ग्रस्त इनकी जितनी भी निंदा की जाय कम है। यों,विभीषण/जयचन्द सब जगह आपको मिलेंगे।जहां पूरा देश और कई सारे बाहरी मुल्क भी धारा 370 को हटाए जाने की तारीफ कर रहे हैं,वहां ये हैं कि इनके पेट में मरोड़ लगे हुए हैं।इन्हीं ब्लैक शीपस के कारण कश्मीरी पंडित समाज को हमेशा नीचा देखना पड़ा है ।इनकी भरपेट भर्त्सना की जानी चाहिए और बहिष्कार भी।
इनके लिए विभीषण शब्द का प्रयोग इस लिए किया गया चूँकि विभीषण रामभक्त अवश्य था।मगर,इतिहास में उस पर दोष अथवा आरोप यह लगता है कि उसने अपने स्वामी यानी रावण के अंदरूनी भेद राम को बता दिए।नहीं बताता तो शायद राम की विजय कठिन हो जाती।कहावत भी है :’घर का भेदी लंका ढाए।’ दुश्मन के साथ मिलने वाले को ही विभीषण कहते हैं।चाहें मजबूरियां कुछ भी हों।मेरे विचार से ये सभी विभीषण अथवा जयचन्द हैं।आल जम्मू कश्मीर पंडित समिति/समाज और ‘पनुन कश्मीर’ जैसी संस्थाओं को इन ‘दोगलों’ की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए एक निन्दा-प्रस्ताव पारित करना चाहिए।
सरकार चाहे तो इन भद्रजनों की ‘कुंडलियों’ की जांच बारीकी से करवाए ताकि यह पता लग जाय कि इनके गुण और तार कहाँ-कहाँ और किन-किन कुंडलियों से मिले हुए हैं?

0Shares

87total visits,3visits today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *