धारा 370 : बिना संघर्ष और जनता के बीच गए विपक्ष का कोई भी विरोध, सिर्फ़ कोरी राजनीति होगी

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विशाल यादव
जहाँ तक धारा 370 पर विपक्षियों के विरोध का सवाल है; तो यह सनद रहे की यह मुद्दा संघ के वैचारिकी का हिस्सा रहा है। संघ ने इस मुद्दे पर बहुत काम किया है,उसनें अपनें स्वयंसेवकों से लेकर आमजनमानस तक को इस पर बेहतर ढंग से जागरूक किया है,इसके विपरीत विपक्ष इस मुद्दे पर बात करनें से भी कतराता रहा है,यही कारण है की आज़ जब देश के बड़े भूभाग के रहवासी इसपर अपना समर्थन दे रहें हैं तब विपक्ष का विरोध जनसामान्य को हास्यास्पद लग रहा है।

परस्पर सहमति-असहमति के विवेक से ही लोकतंत्र मज़बूत होता है लेकिन इन दोनों परिस्थितियों में आप आमजनमानस को कितना संतुष्ट कर पातें हैं यह महत्वपूर्ण है। आज़ जब विपक्ष लोकतंत्र की दुहाई देकर सरकार से आम कश्मीरियों को विश्वास में लेकर धारा 370 पर फ़ैसला लेनें की बात करता है तो गाँव मे रहनें वाले सामान्य व्यक्ति के मन मे भी यह सवाल कौंध जाता है की पिछले पांच दशकों से सत्ता में रहनें के दौरान आपको इस बात का ध्यान क्यों नहीं आया? आज़ भाजपा और संघ इसलिए मज़बूत हैं कि उन्होंने अनवरत लोगों के बीच में रहकर उनकों अपनी विचारधारा से जोड़ा है,अपनें एजेंडे पर लोगों का समर्थन लिया है,अपनी नीतियों पर लोगों को जागरूक किया है। जबकी इसके विपरीत विपक्ष ने हमेशा अन्यान्य कारणों से इन सवेंदनशील मुद्दों से किनारा करनें में ही अपनी भलाई समझी है। आज भी संसद में जब विपक्ष इन मुद्दों का विरोध करता है तो उसके तर्कों को देखकर उनकी बहस महज़ विपक्षी धर्म की औपचारिकता से ज़्यादा कुछ नहीं लगती। लोकतंत्र में पक्ष-विपक्ष का निर्माण जनता करती है लेकिन आज़ विपक्ष जनता के कितनें पास है यह किसी से छुपा नहीं है,बिना संघर्ष और जनता के बीच गए विपक्ष का कोई भी विरोध का सिर्फ़ कोरी राजनीति है और कुछ नहीं।

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