छत्‍तीसगढ राजभाषा से सम्मानित डा० गीता शर्मा को ‘लेखक श्री’ सम्‍मान और ‘विद्यासाग’ मानद सम्‍मान

Chhattisgarh India News Literature

छत्तीसगढ़ ब्यूरो।
शिवमहापुराण और इशादी नौ उपनिषदों जैसे उत्‍कृष्‍ट ग्रथों का छत्तीसगढी भाषा मे अनुवाद कर,भाषा को राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पटल पर सम्मानित कर, उसका मान बढाने वाली डा० गीता शर्मा को ,जगदलपुर में ‘लेखकश्री’ अकादमी पुरस्‍कार से सम्मानित किया गया।उनका आलेख worldwide portal मे प्रकाशित भी हुआ है। सामाजिक विज्ञान एवं शोध संस्‍थान इलाहाबाद द्वारा प्रकाशित “संबोध”जिनके संपादक डा० रुपेन्‍द्र कवि जी हैं,मे इनका बस्‍तर में छत्तीसगढ़ भाषा एक आशा,आलेख प्रकाशित हुआ।प्रमुख आयोजक डा० रुपेन्‍द्र जी थे, मुख्‍य अतिथि पद्‍मश्री धर्मपाल सैनी जी थे। भव्‍य समारोह के बीच सम्मानित डा० गीता शर्मा जी ने अपनी बाते रखीं, और प्रथम दस आलेख में स्‍थान प्रऻप्‍त कर लेखकश्री अकादमी सम्मान से सम्मानित हुईं। विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ भागलपुर का इस बार का दीक्षांत समारोह वर्धा महाराष्ट्र में 12-13 अक्‍टूबर को हो रहा है।इस समारोह में उन्हें विद्यापीठ सम्मान से विभूषित किया जाएगा। ॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑॑
बताते चलें कि डा०गीता,अपनी लोकभाषा छत्तीसगढ़ी को लेकर देशभर के मंचों,आयोजनों,समारोहों और राजभवनों तक पहुंचाने वाली एकमात्र लोकभाषा साधिका हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा का विस्तार और सम्मान दिलाना ही,अपने जीवन का एकमात्र लक्ष्य बना लिया है। धुन की पक्की गीता,कश्मीर से कन्याकुमारी तक कहीं भी लोकसंवाद और भाषा-साहित्य का आयोजन हों,वहां नज़र आतीं हैं।उनकी यह मेहनत अब रंग भी ला रही है। अब वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ी भाषा को वह संवैधानिक और सामाजिक अधिकार मिलेगा जिसका वह अधिकारी है। और इस सफर का एकमात्र हमराह डा०गीता होगीं। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार को गीता के इस अथक परिश्रम पर ध्यान देनाही चाहिए।

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