कोई दस बरस का यह रिश्ता

International News Literature
चंदन तिवारी
कोई दस बरस का यह रिश्ता है। नेह छोह प्यार दुलार से लबालब भरा हुआ। दस बरस पहले एक गांव में गयी थी। वहीं मुलाकात हुई सर से। निर्गुनिया गीत सुनायी। फिर रिश्ता और और और नेह के धागे से बंधता गया। फिर जब नदी गीतों को गाने की शुरुआत की तो रांची में एक खास शो की। सर और आशा मैम पांच घँटे रुके। फिर फिर फिर नेह प्यार का यह रिश्ता और बढ़ता ही गया। मेरे हर गीत (प्रेमगीतों को छोड़कर, वह मैं नहीं भेजती सर को) के पहले श्रोता सर और मैम। हर बार फोन आना कि सुना। फिर कई बार यात्रा से फोन करना कि चन्दन देखो तेरा गीत बज रहा गाड़ी में। गोदना वाला बहुत सुनता हूँ। बटोहिया भी। तेरे ही गीत बजते हैं गाड़ी में। फिर यह फोन भी आते रहना कि रांची आती हो तो भाग नही जाया करो हर बार। घर आया करो। इस बार अखबार में खबर छपी कि मैं प्रेस क्लब में सम्मानित हो रही हूँ। सर से बात हुई, उन्होंने कहा कि घर आओ, आशा (मैम) बुला रही हैं। घर गयी। ढेर देर तक बतकही। भोजपुरी गीतों पर बात। साथ में बोनस यह रहा कि रवि दत्त बाजपेयी सर भी मिल गये। रवि दत्त सर को बहुत पहले से जानती हूँ,मिली पहली बार। आस्ट्रेलिया में रहते हैं। और ऐसे ही बात बात बात होती रही। खूब सारी बात। सर को विदेश निकलना था, तैयारी करनी थी लेकिन बतकही में हम रम गये थे। अंत में जब विदा होने लगी तो मैम वैसे ही विदा करने लगी जैसे बेटी विदा होती है घर से। मन भावुक हो गया। चलते चलते सर ने फिर से कहा-चंदन, भोजपुरी का दर्शन बहुत गहरा रहा है। जोगियों का गीत, कबीर का गीत,गांव की महिलाओं का गीत,राम-कृष्ण का गीत…यह सब आत्मा है। बहुत सारी चीजें आते रहती हैं। क्या चल रहा यह जानना जरूरी है लेकिन करना क्या है यह अपने विवेक से तय करना,वक्त के प्रवाह में आकर नहीं। वक्त लग सकता है लेकिन अपनी जिद पर,अपने संकल्पों के साथ चलनेवाले अपनी राह तैयार करते हैं। मैं सर से जब भी बतियाती हूँ या मिलती हूँ,ऊर्जा से भर जाती हूँ। मैम से जब भी मिलती हूँ, उनके मातृत्वभावी नेह प्यार से रोम रोम सराबोर हो जाता है।
0Shares

71total visits,1visits today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *