इस बूढ़ी अम्मा की आखिरी उम्मीदों के लिए भारत सरकार को उसके बेटे को नेपाल से लाना ही होगा

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अम्मा की मदद सिर्फ़ बस सिर्फ़ आप कर सकते हैं…

अम्मा की कहानी उनकी ज़ुबानी बताता हूँ …
अम्मा का बेटा २८ वर्षीय महेन्द्र की शादी बड़ी ख़ुशियों के साथ की गई बहु घर आइ और अम्मा की ख़ुशी का ठिकाना न रहा अम्मा ने बेटे से कहा बेटा कब तक गाड़ी दूसरों की चलायेगा कुछ पैसे इकट्ठा कर के कोई गाड़ी ले लो और मेहनत से काम करो जिससे अपना घर हो अपनी गाड़ी हो और सुकून रहे बेटा महेन्द्र अभी तक दूसरे की गाड़ी चला कर आम्मा का और अपना पेट भरता था अब एक और सदस्य बढ़ गया था संगिनी -अपनी मेहनत की कमाई का बचा पैसा जमा कर के महेन्द्र ने एक पिकप लोन पर ली और ख़ुशी ख़ुशी जीवन जीने लगा
तीन शाल पहले वह बनारस से पड़ोसी देश नेपाल स्थित काठमांडू भाड़े का कुछ सामान लेकर निकला था फिर वह नेपाल से वापस न आ पाया …
अम्मा बताती हैं जिस दिन महेन्द्र गया था उसके दूसरे दिन उसने फ़ोन किया और बताया की माँ मुझे नेपाल पुलिस ने पकड़ लिया है और मुझे जेल ले जाया जा रहा है।महेन्द्र ने अपनी माँ को बताया की माँ रास्ते में एक मोटर साइकिल वाले का एक्सिडेंट हुआ था जिसे मैंने गाड़ी खड़ी कर के स्थिति देखना चाहा ही था की तब तक नेपाल पुलिस ने मुझे ही पकड़ लिया और थाने लेकर चली आइ और आज अपराधी बना कर जेल भेजा जा रहा है। माँ बिबस थी चाह कर भी कुछ नही कर पा रही थी और अंततः उसे सज़ा हो गई और वह इस समय नेपाल के नवलपुर पराछी जेल में सज़ा काट रहा है

हालत पर रोना आया …

माँ तो माँ होती है ख़ैर मेरी तो बचपन से नही है पर अगर होती तो ज़रूर ऐसी होती मित्रों आम्मा का एक ही बेटा था जो काम कर खिलाता था और मकान का किराया भरता था पर उसके जेल जाने के बाद से माँ की ज़िंदगी नर्क हो गई ६५ साल की उम्र में में न कोई काम कर सकती है न कोई रोटी का प्रबंध करने वाला था माँ ने बहू को समझा बुझा कर हालातों का हवाला देकर उसे माईके भेज दिया
और ख़ुद चौराहों पर भीख माँग कर अपना पेट पालने लगी जो पैसे बचते थे उससे वो मकान का किराया देती हैं इस समय दो माह से किराया न दे पाने के कारण मकान मालिक द्वारा भी मानसिक तौर पर प्रताड़ित की जा रही हैं

ईश्वर इस उम्र में इतना इम्तिहान न ले …,

मित्रों उम्र बनी है आफ़त -अम्मा की उम्र ६५साल है हड्डियों का दर्द काफ़ी दुःख दे रहा है
पर बेटे के मोह में पूरा दिन कभी भीख तो कभी नेता तो कभी अधिकारियों के चक्कर लगाती रहती हैं पर रूकती नही हैं मित्रों उनका रोना किसी को भी रुला दे

माँ पढ़ी लिखी नही हैं पर किसी से प्रार्थना कर एक दफ़्ती पर अपनी समस्या लिखवॉ ली हैं और हर ज़िम्मेदारों के सामने वो उसे लेकर खड़ी रहती हैं पर मंदबुद्धि के अधिकारी देखते हैं पर उनका कहना है वो पत्र नही देती -ये कथन किसी और का नही बल्कि बनारस के ज़िलाधिकारी का है जब उन्हें फ़ोन पर बताया जाता है मैं और मेरे साथी अन्य जनपद से आये हैं आपसे मिलकर वार्ता करना चाहते हैं तो जवाब मिलता है क्यों मिलना चाहतें हैं मैं उसमें कोई मदद नही कर पाऊँगा
अब आप सोचिए इस अफ़सर की मानसिक स्थिति क्या होगी इस अफ़सर से साहियोग लेने के लिए हम लोगों ने दूसरे आईएएस अफ़सर की मदद ली की इस मामले में यह अफ़सर व्यक्तिगत रुचि ले और अम्मा की थोड़ी बहुत ही मदद मिल जाये पर अफ़सोस -बिना मकान -बिधवा पेंशन के जीवन जी रही हैं माँ और सरकार बड़े बड़े दावे पेश कर रही है …

इतना दर्द ऊपर से पुलिस की प्रताड़ना …
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बनारस के बेटे देश के प्रधानमंत्री जब जब आते हैं तब अम्मा उनसे मिलने का प्रयास करती हैं पर पुलिस उन्हें अपराधियों की भाँति थाने में पूरा दिन भूनखे बिठाये रहती है और शाम छोड़ देती है

ख़ैर जल्द हीं मैं और Mitra Prakash नेपाल स्थित कारावास पहुँच कर महेन्द्र से मिलेंगे वहाँ के क़ानून को जानेगे और आगे की भूमिका आप सभी मित्रों संग शेयर करेंगे
हमारा प्रयास है अम्मा का बेटा सकुशल भारत आ जाये ..

आप सभी साहियोग करने का अगर मन बनाएँ तो एक प्रयास किया जा सकता है महेन्द्र वर्मा को भारत लाया जा सकता है

Facebook और whatshop पर ख़ूब शेयर करिये अपने मित्रों से अनुरोध करिये आपका एक शेयर माँ के बुढ़ापे का सहारा बन सकता है

-रंजीत कुमार के फेसबुक वाल से

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