आख़िरकार एक और राजघराने का भाजपा में विलय हो गया

Lucknow Political News

-अतुल मोहन गहरवार
अमेठी का राजघराना एक बार फिर सुर्खियों में हैं। यह चर्चा उनके कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर भगवा दामन थामने को लेकर है। यूपी विधानसभा चुनाव में प्रचार कमेटी के मुखिया रहे संजय सिंह को गांधी परिवार का बहुत ही करीबी माना जाता था। एक समय वह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे। बैडमिंटन खिलाड़ी सैयद मोदी मर्डर केस और राज घराने की विरासत को लेकर हुई जंग की वजह से वह पहले विवादों में रह चुके हैं। 28 जुलाई 1988 को लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम के बाहर बैडमिंटन खिलाड़ी सैयद मोदी की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के वक्त सैयद मोदी स्टेडियम से प्रैक्टिस करके निकल रहे थे। अभी वे सड़क पर पहुंचे ही थे कि वहां पहले से घात लगाए हत्यारों ने उनपर ताबड़तोड़ 8 गोलियां दाग दी। साफ था कि गोली चलाने वाले नहीं चाहते थे कि सैयद मोदी जिन्दा रहे। हत्यारे अपने मंसूबे में कामयाब भी हो गए। शुरुआती जांच के बाद इसको सीबीआई को सौंप दिया गया। सैयद मोदी हत्याकांड में शुरुआती जांच के दौरान अमेठी के राजघराने से ताल्लुक रखने वाले तत्कालीन जनमोर्चा नेता संजय सिंह का नाम सामने आया। उस वक्त यूपी की राजनीति में एक भूचाल सा आ गया था। पूरे देश की निगाहें इस हाई प्रोफाईल मर्डर केस की जांच पर टिकी थी। हर कोई यही जानना चाहता था कि आखिर किसके इशारे पर इस हत्यकांड को अंजाम दिया गया था। नवंबर 1998 में सीबीआई ने इस केस में चार्जशीट दाखिल की थी जिसमें कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया था।

ऐसी रची मोदी के मर्डर की साजिश : आरोपियों में संजय सिंह, अमिता मोदी, जितेंद्र सिंह, भगवती सिंह, अखिलेश सिंह, अमर बहादुर सिंह और बलई सिंह शामिल थे. सीबीआई का आरोप था कि संजय सिंह, अमिता मोदी और अखिलेश सिंह ने सैयद मोदी के मर्डर की साजिश रची थी और बाकी के 4 लोगों ने इस हत्याकांड को अंजाम तक पहुंचाया था. सीबीआई की थ्योरी के मुताबिक के डी सिंह बाबू स्टेडियम के पास मारुति कार में से जब भगवती सिंह ने सैयद मोदी पर रिवाल्वर से फायरिंग कि तो दूसरे आरोपी जितेंद्र सिंह ने उसका साथ दिया था।

प्रेम त्रिकोण का था पूरा मामला : बताया जाता है कि सैयद मोदी, अमिता मोदी और संजय सिंह के बीच गहरी दोस्ती थी. इसी दोस्ती की वजह से संजय सिंह और सैयद मोदी का परिवार एक दूसरे के बेहद करीब भी आ गया था. लेकिन सैयद मोदी के कत्ल के बाद खेल, राजनीति और रिश्तों की एक अजीब सी उलझी हुई कहानी सामने आने लगी थी. सीबीआई का आरोप था कि संजय सिंह और अमिता मोदी के बीच पनप रहा संबंध ही सैयद मोदी की मर्डर की वजह बना. सीबीआई ने जो केस बनाया उसके मुताबिक ये पूरा मामला प्रेम त्रिकोण का था।

रामजेठमलानी ने संभाला मोर्चा : सीबीआई ने अमिता मोदी को हिरासत में लेकर उनसे कड़ी पूछताछ भी की थी. जांच के दौरान सीबीआई ने अमिता मोदी की डायरी भी जब्त की, जिसमें संजय सिंह से उनके नजदीकी रिश्ते की बातें दर्ज थी. सीबीआई का कहना था कि संजय सिंह ने ही सैयद मोदी की हत्या के लिए अपने साथी अखिलेश सिंह की मदद ली और उन्हें मारने के लिए भाड़े के हत्यारे भेजे थे. अदालत में संजय सिंह की तरफ से दिग्गज वकील रामजेठमलानी ने मोर्चा संभाला था. इसके बाद राजनीति, खेल और रिश्तों में उलझी हुई एक कानूनी जंग छिड़ गई थी.

बरी हो गए संजय और अमिता : सैयद मोदी मर्डर केस की जांच जब पूरी हुई तो कोर्ट में सीबीआई के तमाम दावों की धज्जियां उड़ गई थी. सीबीआई को पहला झटका उस वक्त लगा जब संजय सिंह और अमिता मोदी ने चार्जशीट को ही अदालत में चुनौती दी और फिर इन दोनों के खिलाफ पुख्ता सबूत न होने की वजह से सेशंस कोर्ट ने सितंबर 1990 में संजय सिंह और अमिता मोदी का नाम इस केस से ही अलग कर दिया. दूसरा झटका 1996 में लगा जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक और अहम आरोपी अखिलेश सिंह को इस मामले से बरी कर दिया।

सात में एक आरोपी को सजा : आरोपी जितेंद्र सिंह भी इस मामले से बेनेफिट ऑफ डाउट देकर रिहा कर दिया गया. इस केस के 7 में से चार आरोपी तो पहले ही रिहा हो गए और बाकी बचे अमर बहादुर सिंह का संदिग्ध हालत में मर्डर कर दिया गया और एक और आरोपी बलई सिंह की मौत हो गई. सैयद मोदी मर्डर के आखिरी आरोपी भगवती सिंह को लखनऊ के सेशन कोर्ट ने दोषी करार दिया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. 22 अगस्त 2009 को अदालत ने सीबीआई की फांसी की सजा की मांग को खारिज कर दिया था.

अभी जारी है विरासत की जंग : पिछले 26 साल के इस लंबे अर्से में अमेठी राजघराने के राजा संजय सिंह और अमिता मोदी की जिंदगी ने भी कई उतार–चढाव देखे हैं. 1090 में मोदी मर्डर केस से बरी होने के बाद 1995 में संजय ने अमिता से शादी कर ली, लेकिन तब तक संजय और गरिमा के घर अनंत विक्रम सिंह के अलावा दो बेटियों महिमा सिंह और शैव्या सिंह का जन्म हो चुका था. अब गरिमा सिंह और उनके तीनों बच्चे अमेठी राजघराने की विरासत पर अपना दावा ठोंक रहे हैं. संजय की पहली पत्नी गरिमा आज भी खुद को तलाकशुदा नहीं मानती हैं।

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