आठवीं अनुसूची से पहले भोजपुरी के लालित्य को बचाने की जरूरत है

Gaheb Baghe India News

उ.प्र. हिन्दी संस्थान, लखनऊ ने भोजपुरी के संस्कार गीत नामक ग्रंथ का प्रकाशन किया है ,जिसमे एक हजार से अधिक हिन्दू और मुस्लिम संस्कार गीत हैं।इस महत्वपूर्ण ग्रंथ की सामग्री का संकलन और सम्पादन भोजपुरी की मर्मज्ञ विदुषी बहन शची मिश्रा ने किया है जो पूना मे रहती है।अपनी बोली बानी के प्रति उनका यह अनुराग उल्लेखनीय और प्रणम्य है।
जो लोग भिखारी ठाकुर और शारदा सिन्हा की भोजपुरी को बाजारु बनाने पर उतारू हैं ,उनसे विनम्र निवेदन है कि वे यह ग्रंथ खरीदकर पढें और इसमे निहित भोजपुरी की आत्मा को विस्तार दें। आठवीं अनुसूची की मांग को दरकिनार कर सबसे पहले भोजपुरी के लालित्य को बचाने की जरूरत है।आज भोजपुरी पर जो अश्लीलता का ठप्पा लगाने मे लगे हैं वे अगर इस ग्रंथ के लोकगीतों का प्रचार प्रसार करें तो भोजपुरी का भी कल्याण होगा और इससे जुड़े व्यापारियों का भी।
लगभग ६०० पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य ५००/रु है।मुझे यह जानकर दुख हुआ कि अभी मात्र चार पुस्तकें ही बिक पायी हैं जिनमे चौथा खरीददार मै स्वयं हूं
हिन्दी संस्थान और शची मिश्रा जी को इस सारस्वत अनुष्ठान के लिए हार्दिक बधाई

-राजबहादुर मिसिर

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