अब “एविएशन सेक्टर” भी भीषण “मंदी” की चपेट में

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-अजय श्रीवास्तव
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भारत में आर्थिक मंदी ने चौतरफा पैर फैलाना शुरू कर दिया है।अभी आटोमोबाइल सेक्टर की मंदी की चर्चा थमीं नहीं कि एविएशन सेक्टर का घाटा सामने आ गया।फायदे में चल रही इंडिगो समेत चार बडी विमानन कंपनियों को वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 5912 करोड का घाटा हुआ है।
आपको बता दें इस प्रतिस्पर्धा के युग में अगर एक बार कोई एविएशन कंपनी घाटे में आ जाती है तो उसका “घाटे से उबरना” बेहद कठिन हो जाता है।आपसी प्रतिस्पर्धा के कारण विभिन्न कंपनियों ने टिकट के दाम बेहद कम कर दिये हैं जबकि आँपरेशनल कास्ट और टैक्स में लगातार बढोत्तरी हो रही है।कोढ़ में खाज तेल के बढ़ते-घटते दाम है।अमेरिका का ईरान से टकराव और कड़ी पाबंदियों का असर भारत में दिखने लगा है।ईरान भारत को भारतीय करेंसी में तेल उपलब्ध कराता था जिसकी वजह से भारत काफी सकून की स्थिति में था लेकिन अमेरिका की बेजा जिद्द की वजह से भारत को भी दुष्परिणाम झेलने पड़ रहें हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक इंडिगो को पिछले चार वर्षों से मुनाफा हो रहा था लेकिन वित्त वर्ष 2018-19 में कंपनी को 1,490 मिलियन रूपया का घाटा हुआ है।वहीं स्पाइसजेट को इस दौरान 2,661 मिलियन रूपये का नुकसान हुआ।वहीं गो एयर को 8,970 मिलियन रूपये जबकि सरकारी विमानन कंपनियों को 2018-19 में 46,000 मिलियन रूपये का नुकसान झेलना पड़ा है।
गौरतलब है कि एविएशन सेक्टर में अपनी धाक जमाने के लिए विभिन्न कंपनियां गलाकाट प्रतिस्पर्धा में पड़ गई हैं, सीटों की संख्या अधिक बढ़ाने से उसे भरने के लिए यात्री किराये में काफी कटौती की जा रही है।
सबसे पहले इंडिगो ने सस्ते दामों पर टिकट उपलब्ध कराकर इस प्रतिस्पर्धा को रोचक बना दिया था मगर अब वह अपने हीं हथियार का शिकार हो रहा है।
भारत सरकार लाख दावा करे मगर मंदी ने विभिन्न सेक्टरों में अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है।आटोमोबाइल सेक्टर के बाद अब एविएशन सेक्टर इसके चंगुल में है जिससे निकलने का कोई रास्ता भी सुझ नहीं रहा है।

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