वाघा बॉर्डर की आँखों देखी : लब्ज़ और लिबास तो बदला-बदला अमृतसर में दिखा पर अर्थ में काशी के कबीर मिले

– विनोद कुमार लब्ज़ और लिबास तो बदला-बदला अमृतसर में दिखा पर अर्थ में काशी के कबीर मिले, वह भी उस स्वर्णमंदिर में जहां मूर्ति नहीं गुरु की पूजा करती जनता गुरुवाणी में राम और कबीर-कबीर कह रही थी। जहां मैं भी अरदास के लिए हरमंदिर साहब के सामने खड़ा होकर,भाषा से अनभिज्ञ होते हुए […]

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क्या स्लीपर वाले इंसान नहीं होते…?

#सफर -कुलीना कुमारी बढ़ती महंगाई को देखते हुए व बचत करने के ख्याल से इस बार छोटे भाई की शादी में अपना गांव बिहार जाने के लिए मैंने स्लीपर से जाना तय किया। पति ने बहुत रोका स्लीपर का टिकट काटने के लिए, लेकिन चूंकि बेटा भी साथ जा रहा था तो दो आदमी में […]

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