मितान यानी हर सुख-दुख का साथी…

-रायपुर से संजीव शर्मा भारत में फ़्रेंडशिप डे मनाने की प्रथा भले आज चलन में आई हो छत्तीसगढ़ में मित्र बनाने और मित्रता निभाने की एक लंबी सांस्कृतिक परम्परा रही है. फ़्रेंडशिप डे तो एक दिन का मामला है लेकिन छत्तीसगढ़ की यह परंपरागत मित्रता ऐसी होती है कि इसके आगे ख़ून के रिश्ते फीके […]

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कई-कई रङ्गों के चश्मे लेकर चलते हैं हम…

-संत समीर कल बधाई दे चुका, पर आज मैग्सेसे की चयन समिति को शाबाशी देने का मन कर रहा है कि उसने भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (प्रिण्ट मीडिया के बारे में सोचना पड़ेगा) के हिसाब से आज की तारीख़ में रवीश कुमार के रूप में सबसे बेहतर चयन किया है। रवीश जी से अपना तथाकथित परिचय […]

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तुम जानोंगे देश जीतता कब है और वास्तव में हारता कब है

मित्रों तो ये वे युवा हैं जिन्होंने हिन्दुस्तान को जिताने और हराने के मापदण्ड तय कर रखे हैं। जी! 11 लोगों की भारतीय टीम 48 घण्टों की मशक्त के बाद हार गयी। शाम चाय के नुक्कड से आया हँू भारत माता के ये युवा बोल रहे थे हिन्दुस्तान हार गया। मैनें पूछा कैसे !तो बताया […]

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कश्मीर की असल समस्या आतंकवाद नहीं सियासत है !

-रमेश मौर्य हम जहाँ जा रहे थे वहाँ कोई बेग़मपुरा जैसा यूटोपिया तो बिल्कुल नहीं था। बेग़मपुरा मध्यकालीन संत एवं सुधारक रैदास का एक कल्पना लोक है, जिसमें वह एक ऐसे राज की कल्पना करते हैं जहाँ सभी को अन्न (भूख से मुक्ति) मिले और किसी को गैर-बराबरी का दर्द न झेलना पड़े। खैर संत […]

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