वह अपने आँसुओं को रोक नहीं सकीं

कालजयी:         -राहुल सांकृत्यायन कनैला मेरा पितृग्राम है। मैं ननिहाल (पन्दहा) में पैदा हुआ और वहीं पला पढ़ा भी, इसलिए जन्मग्राम वही है। हर गाँव की आपबीती रोचक कथाएँ होती हैं जिनको बाल्य कल्पना और भी मोहक बना देती है। हो सकता है, मेरे लिए भी कनैला की कथाएँ आकर्षक मालूम हुई […]

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