जन्म लेते ही उठा मां का साया, न्यायाधीश ने स्तनपान कराकर नवजात को लिया गोद

–रानी राजेश की वाल से गुजरात में एक जिला विकास अधिकारी और उनकी न्यायाधीश पत्नी ने बेटी बचाओ-बेटी पढाओ अभियान को साकार करते हुए दुनिया के सामने मिसाल पेश की है. गुजरात के आणंद के जिला विकास अधिकारी अमित प्रकाश यादव और उनकी न्यायाधीश पत्नी चित्रा ने दुनिया में आंख खोलते ही मां का साया […]

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यूं ही नहीं कोई रवीश बनता …

@अरविंद सिंह रवीश होने का मतलब है अपने समय से संघर्ष, परिस्थितियों से संघर्ष और भविष्य का दृष्टा। जब सच और झूठ का फासला मिटने लगे, जब आम इंसान की आवाज़, सत्ता के शोर में दबने लगे। जब अंधभक्ति, अंधविरोध और चारणगान ही समय की पहचान बनने लगे। जब जितना ही लोकतंत्र और पराजय राष्ट्र […]

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मैं ऐसी सवारी नहीं करता, जिसकी लगाम मेरे हाथ में न हांे!

बदलते दौर की पत्रकारिता : डाॅ.विवेकी राय से, अरविन्द सिंह की बातचीत पर आधारित : जो पत्रकार हैं वो सामान्य लोग ही होते हैं। वे दबाव में आ जाते हैं। जिससे क्षेत्र के साथ न्याय नहीं हो पाता है। दूसरे आजकल कई तरह की नई-नई बिमारियाँ चली हंै। जातिवाद, पार्टियों की राजनीति, फिर उसी में […]

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आजमगढ़ : जहां भूख का भूगोल और बगावत का इतिहास पढ़ा जाता है…

■-अरविन्द कुमार सिंह ‘‘क्या है इस आजमगढ़ की सरजमी में कि भूख के भूगोल पर बगावत का इतिहास भारी पड़ जाता है। तमसा और घाघरा के पानी में आखिर बगावत की कहानी क्यों लिखी और पढ़ी जाती है। भूख और मुफलिसी से लड़ती जवानी में तमसा और घाघरा सी रवानी कैसे आ जाती है। इस […]

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एक थी नीरा…

नीरा आर्य (1902 – 1998) की संघर्ष पूर्ण जीवनी: नीरा आर्य का विवाह ब्रिटिश भारत में सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के साथ हुआ था | नीरा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना में अपने अफसर पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी । नीरा आर्य आजाद […]

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जब जेपी ने इंदिरा से पूछा, तुम्हारा खर्चा कैसे चलेगा ?

-रेहान फ़ज़ल 25 जून, 1975 की रात डेढ़ बजे का समय। गाँधी पीस फ़ाउंडेशन के सचिव राधाकृष्ण के बेटे चंद्रहर खुले में आसमान के नीचे सो रहे थे। अचानक वो अंदर आए और अपने पिता को जगा कर फुसफुसाते हुए बोले, “पुलिस यहाँ गिरफ़्तारी का वारंट ले कर आई है।” राधाकृष्ण बाहर आए। बात सच […]

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मेेरा अपना ही घर परदेश है…

-गुंजेश्वरी प्रसाद मैं अकेला नही हू। मेरा अपना घर ही परदेश नही बना है। सुभागी जो मेरी पड़ोसिन है अपने ही घर में परदेशी की भांति रहती है।वह 83-84 वर्ष की बुढ़िया है। जाति की पासी है। गाँव की परम्परा के अनुसार उसे मैं भौजी कहता था और मजाक करता था। भरी जवानी में वह […]

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मेरी आवाज़ गूंगी है कि तेरे कान बहरे हैं ?

इन 16 सालों में गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और इम्फाल की अपार जलराशि मंे कितनी जलधारा बह गयी होगी, किसी को क्या पता । इन वर्षों में कितने घरों में शहनाई बजी होगीं, कितनी युवतियां माँ बन चुकी होगीं, और पैदा हुये बच्चे किशोरावस्था में पहुँच सपने बुनने लगे होंगे। इसी दौर में, अपनी यौवन के […]

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पहले कांग्रेस को समाजवादी बनाने की कोशिश करूंगा, नहीं बना सका तो इसे तोड़ दूंगा !

” जिंदगी का कारवां “         -चंद्रशेखर प्रजा सोशलिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस्तीफा देने के बाद घटनाएं तेजी से घटी । अशोक मेहता संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में शामिल होने के लिए पहले ही न्यूयॉर्क चलें गए थे । इधर दल की कार्यसमिति ने उनकी पार्टी-सदस्यता समाप्त कर दी […]

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