अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले शूरवीर फतेह बहादुर शाही को याद रखिए, भले ही इतिहासकारों ने उन्हें भुला दिया

@ गोपाल जी राय/वरिष्ठ पत्रकार व लेखक जब जब भारत में स्वतंत्रता संग्राम के मूर्त-अमूर्त वीरों की गाथा गाई जाती है, तब तब भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ‘प्रथम उद्घोषक’ रहे महानायक फतेह बहादुर शाही की याद सबसे पहले आती है। क्योंकि इतिहास में उनके नायकत्व और जुझारूपन को वह स्थान नहीं मिला, जिसके वह पात्र […]

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आठवीं अनुसूची से पहले भोजपुरी के लालित्य को बचाने की जरूरत है

उ.प्र. हिन्दी संस्थान, लखनऊ ने भोजपुरी के संस्कार गीत नामक ग्रंथ का प्रकाशन किया है ,जिसमे एक हजार से अधिक हिन्दू और मुस्लिम संस्कार गीत हैं।इस महत्वपूर्ण ग्रंथ की सामग्री का संकलन और सम्पादन भोजपुरी की मर्मज्ञ विदुषी बहन शची मिश्रा ने किया है जो पूना मे रहती है।अपनी बोली बानी के प्रति उनका यह […]

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मुझे कुछ नया पढने के साथ ही कुछ नया करने की जिज्ञासा हमेशा रही इसी आदत के कारण नए – नए लोगो से मिलना नए स्थानों पे जाना और कुछ नया खोज के लाना अब आदत में शुमार है आइये आज मिलवाता हूँ | राबिया बसरी से —- राबिया बसरी के गीत —- राबिया 713 […]

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कुछ याद उन्हे भी कर लो,जो लौट के घर न आयें

–Ramkumar singh विश्वविद्यालय लखनऊ में प्रवेश के साथ इंटर युनिवर्सिटी बैंडमिंटन टीम का चयन हुआ जिसमे मैं भी चयनित हुआ।टीम गठन के उपरांत नार्थ ज़ोन इंटर यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट में लखनऊ विश्वविद्यालय की टीम पच्चीस वर्षों के उपरांत उप विजेता घोषित हुई और हमारी टीम को ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट खेलने का मौका मिला,इसके साथ […]

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कभी मिलती थी पिता की गालियाँ और एक वक्त का खाना,आज है एक बड़ा अफसर

अंसार को कई-कई दिनों तक एक वक्‍त खाना खाकर गुजारा करना पड़ता था.वहीं ऐसे हालातों में अंसार के अब्‍बा चाहते थे कि पढ़ाई छोड़कर वे घर के खर्च में हाथ बटाएं. कभी-कभी कुछ लोगों की कामयाबी हैरत में डाल देती है. ऐसा ही एक नाम है अंसार अहमद शेख. महाराष्ट्र के जालना जैसे छोटे से […]

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वाह! विधायक हो तो ऐसा…

ये घेरे में नीली टीशर्ट वाला इंसान अमित कुमार टुन्ना हैं। वैसे तो यह सफेद शर्ट पेंट में अपनी एस यू वी में ही दिखते हैं लेकिन इन दिनों उनकी रंगत ऐसी ही है। सीतामढ़ी के रीघा से विधायक हैं यह। बीते 10 दिन से बाढ़ पीड़ितों के बीच मजदूर की तरह लगें हैं। रात […]

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स्साला ये छत टूट क्यों नही जाता बाबा ? 

-चंचल प्रोफेसर एच.ए.आजमी पत्रकारिता के अध्य्यापक थे । पढ़ाते थे और बेहतर पढ़ाते थे बाद बाकी इनके पास कोई और लक्षण नही थे जिसे देखने मात्र से यह पता चल जाए कि यह शख़्स जो सामने आ रहा है यह प्रोफेसर भी होगा । निहायत सरल, सहज, संजीदा और भलमानस । उस जमाने की बात […]

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हम एसपी सिंह को याद कर रहे हैं …………………….-चंचल (लेखक)

मित्र संतोष भारती के इस कथन से हम कत्तई सहमत नही हैं कि- एस पी में भगवान शंकर के सारे गुण मौजूद थे ।एस पी जिंदा होते तो हम एसपी के सामने ही जो जवाब देते वह यकीनन ‘ नॉन वेज ‘ भाषा मे एक ‘वल्गर ‘ संकेत होता और सबसे ज्यादा उस पर एस […]

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